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Monday, March 28, 2011

...क्या-क्या नहीं होता क्रिकेट से
    जब-जब भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच खेला जाता है तो दोनों देशों के लोग इसे मैच न मानकर एक युद्घ की तरह देखते हैं। इस युद्घ रूपी मैच में दोनों देशों  की सेनाएं (क्रि केट टीमें) अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं। वहीं दोनों की जनता अपने-अपने ढंग से अपने देश को जीताने के लिए प्रार्थनाएं और दुआएं करते हैं। इस अवसर पर करोड़ों हाथ अपने देश को जीत दिलाने के लिए भगवान की तरफ उठते हैं। जहां जीत मिलने पर एक देश में दीवाली और जश्न का माहौल होता है तो हारने वाला देश गम के सागर में डूब जाता है।
    पाकिस्तान पर समय-समय पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगते रहे हैं जिसके चलते पाकिस्तान के खिलाडिय़ों की खेल भावना पर उंगली भी उठाई जाती रही है। दुनिया भर से उठ रही तमांग उंगलियों के बावजूद अभी तक पाक के हुक्मरानों ने अपने देश के खिलाडियों के फिक्सिंग में शामिल होने के आरोपों को खारिज करते आए थे। लेकिन एक स्टिंग ऑपरेशन में मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर के साथ-साथ पूर्व कप्तान सलमान बट्ट को फिक्ंिसग का दोषी पाया गया। इस बार किसी भी तरह के आरोप पाक के खिलाडियों पर न लगे उससे पूर्र्व ही पााकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने अपने देश के क्रिकेट खिलाडियों को एक चेतावनी देकर उन्हें किसी भी तरह की फिक्सिंग से बचने की हिदायत दी है।
    मोहाली में 30 मार्च को होने वाले वल्र्ड कप के सबसे बड़े मैच पर सभी की निगाहें टिकी हैं। मोहाली में होने वाले क्रिकेट महाकुंभ में दोनों देशों के प्रधानमंत्री इस मैच को देखने के लिए उपस्थित होंगे। जिनकेचलते दोनों देशों के क्रिकेट खिलाडिय़ों का उत्साह और अधिक बढ़ जाएगा। मैच के जरिए दोनों देशों के बीच कड़वाहट को कुछ कम करने की कोशिश में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकि स्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और राष्टï्रपति आसिफ अली जरदारी को मैच देखने के लिए आमंत्रित किया था। इससे पूर्र्व जनरल जिया उल हक से जनरल परवेज मुशर्रफ तक शांति के नाम पर क्रिकेट मैच देखने के लिए भारत आते रहे हैं। लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है और समय समय पर सीमापार से आतंकी हमले होते रहे हैं। इन हमलों में जाने कितने बेगुनाह और मासूम लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी।
    मोहाली स्टेडियम में सीट पाने के लिए क्रिकेट प्रेमियों से ब्लैक मार्केटिंग करने वाले भारी कीमत वसूल रहे हैं। पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के मोहाली स्टेडियम में 25, 500 लोगों के बैठने की क्षमता है पर 22 मार्च तक 15000 टिकटें बिक चुकी थीं। यह मैच देखने के लिए लोगों की बेकरारी का आलम यह रहा कि 15000 वाली टिकट 1 लाख रूपये और 10,000 रूपये की कीमत वाले 50-50 हजार रुपये में बिके। अहमदाबाद में टीम इंडिया ने ऑस्टे्रलिया को हराया था तभी से टीम इंडिया के पक्ष में सटटा लगना शुरू हो गया था। जानकारों के मुताबिक क्रिकेट वल्र्डकप के इस महामुकाबले पर सिर्फ भारत में करीब पांच हजार करोड़ रुपये का सटटा लग चुका है।

Tuesday, March 22, 2011


मेरा  dla पेपर में प्रकाशित एक आर्टिकल

Saturday, March 5, 2011




देश और दुनिया में अपना शक्ति और साहस का परचम फरहराने वाली महिलाएं दिन-पर-दिन सशक्त होती जा रही हैं। जिनकी काबिलियत का हर कोई लोहा मान रहा है। अब बात चाहे उद्योगजगत की हो या घरेलू जिम्मेदारियों की। हर क्षेत्र मेंं महिलाओं ने अपना परचम लहरा रही हैं। अपने देश में कल्पना चावला, सोनिया गांधी, प्रतिभा पाटिल, सुषमा स्वराज, साइना नेहवाल जैसी अनेक महिलाएं हैं। ये महिलाएं ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में निवास करने वाली महिलाओं और लड़कियों के लिए प्रेरणा है। जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों ने ज़माने के कदम से कदम मिलाकर चलने की चुनौती को स्वीकारा है और इसे बखूबी अंजाम भी दे रही हंै। महिला शक्ति के आगे आम आदमी से लेकर अधिकारी, जनप्रतिनिधि तक नतमस्तक हैं। महिला शक्ति का प्रदर्शन एक दिन मुझे भी देखने को मिला। एक स्थानीय कॉलेज में मुझे नौकरी के लिए साक्षात्कार पर जाना था जिसके  लिए मैंने पूरी तैयारी की थी और बड़ी लगन और प्रफुल्लित मन से इंटरव्यू देने निकला। मैं अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए ऑटो ले लिया और बिना किसी परेशानी के इंटरव्यू स्थल पर पहुंच गया। वहां उपस्थित प्रतिभागियों में दो महिलाएं और तीन पुरुष थे। इससे पहले यह साक्षात्कार दो बार कैंसिल हो चुका था। इस बार साक्षात्कार का समय 11 बजे निर्धारित था पर 12 बजे तक परिक्षाथयों की कोई खोज खबर कॉलेज प्रशासन की तरफ से नहीं ली गई। सभी प्रतिभागी परेशान थे यह सोच कर किइस बार भी परीक्षा होगी या नहीं। इस बीच सभी प्रत्याशी एक दूसरे का परिचय पूछने लगे। एक लड़का जो आगरा से आया था, बोला-भाई मैं इस बार अंतिम बार आया हूं, अगर परीक्षा ली जाती है तो अच्छी बात है, नहीं तो फिर दूबारा नहीं आऊंगा।
   एक महिला जो शादी शुदा थी और गाजियाबाद की ही रहने वाली थी। वह बड़ी तत्परता से टाइपिंग करने में व्यस्त थी और किसी की भी बात को वह अनसुना कर रही थी। इतनी ही देर में हमारी परीक्षा लेने के लिए कॉलेज की टीम आ गई। हम पांचों को देख कर, स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा कि आप लोगों कि तैयारी कैसी है? परीक्षा करायी जाए या नहीं? सभी ने एक स्वर में बोला हां। इसके पश्चात कालेज प्रशासन को मजबूरन परीक्षा करानी ही पड़ी। कुछ समय बाद साक्षात्कार पूरा हुआ। उसके बाद हम सब अपने-अपने घर केलिए चल दिए। मैंने घर जाने के लिए ऑटो किया। मेरे बैठने के कुछ समय बाद ऑटो वाले ने तेज गाने चला दिए जिसके चलते मुझे काफी परेशानी हो रही थी। मैंने उसे बंद करने के लिए कहा पर वह नहीं माना और ऑटो से उतार देने की धमकी देने लगा। मैंने चुप रहना ही मुनासिब समझा। दूसरे स्टॉप पर एक महिला ऑटो में बैठी। ऑटो वाले ने कुछ देर बाद फिर  से तेज आवाज में गाने बजाने शुरू  किए। इस पर महिला ने ऐतराज किया और उसे बंद करने के लिए कहा। ऑटो चालक ने एक नजर उसे गुस्से से देखा और फिर अपनी मजबूरी समझते हुए गाने बजाने बंद कर दिए। अब मुझे भी राहत महसूस हुर्ई और नारी शक्ति के आगे नर शक्ति को पीछे छूटते देखा।
   

Wednesday, February 2, 2011



...रफ्तार ने ढहाया कहर

ईश्वर ने इस संसार के सभी प्राणियों को एक ऐसी अलौकिक शक्ति प्रदान की है जिसके अभाव में कोर्ई भी जीव (अब चाहे वह मानव हो या जानवर) अपने को अकेला उदास, अपने से घृणा करने वाला, किसी अनजानी बीमारी से जूझता हुआ पाता है, और वह अपने को अन्य सभी लोगों से कमतर आंकने लगता है। उसके मन में तरह-तरह की कुंठाएं घर कर लेती हैं। आप उस अलौकिक शक्ति नाम जानते ही होंगे। अगर अब भी आप नहीं समझ सके हैं तो हम आपको बता देते हैं उस अलौकिक शक्ति का नाम है 'प्रेमÓ। आप और हम प्रेम की महत्ता से भली-भांति परिचित हंै। यह मृत्यु के इंतजार में बैठे व्यक्ति में भी जीवन जीने का इच्छा जगा देती है। इसके सामने संसार की धन-दौलत मायने नहीं रखती है। भगवान ने इसको बांटने में कोई भेदभाव नहीं बरता है। अब चाहे वह इंसान हो या कोर्ई जानवर, सभी को एक  समान स्नेह भाव प्रदान किया है। कहीं न कहीं हम जाने-अनजाने दूसरों की खुशहाली को ग्रहण लगा रहे हैं। आधुनिक समय में हम अपनी रफ्तार के सामने किसी जीव के प्राणों को बलि देने से नहीं चूकते हंै। ऐसा ही एक वाकया मेरे सामने पेश आया। मैं अपनी नित्य दिनचर्र्या के बाद जब शाम का भोजन ग्रहण करने के बाद टहलने के लिए बाजार गया। बाजार में घूमते हुए मैंने देखा सभी अपने- अपने कामों में लगे थे। यह सब देखते हुए मैं बाजार में आगे बढ़ा। इस दौरान बाजार में सभी वाहन जैैसे साइकिलें, मोटरसाइकिल, स्कूटर आदि आ जा रहे थे। मैंने देखा बाजार में एक किराने की दुकान केपास एक कुतिया जिसके साथ उसके दो पिल्ले (बच्चे) थे। अपने बच्चों को बड़े प्यार से अपनी जीभ से सहला रही थी। और बच्चे भी उसके समीप बड़े आराम से बैठे हुए थे। उनका एक छोटा सा परिवार इतमिनान से बैठा हुआ कुछ सूखे ब्रेड खा रहा था।
  जब मैं बाजार के कोने से वापस घूम कर घर की तरफ आ रहा था तो मैंने देखा एक पिल्ला कुतिया के पास से उठकर सड़क पार कर रहा था तभी एक तेज रफ्तार से आती मोटरसाइकिल जिस पर पर तीन लोग सवार थे। उस पिल्ले के ऊपर से गुजर गयी। बेचारा पिल्ला बुरी तरह से चिल्लाने लगा। उसकी चीख सुनते ही कुतिया उस ओर भागी। उसने अपने पिल्ले को देखा और उस मोटरसाइकिल को जिसने उसके बच्चे को रौंदा। मोटरसाइकिल सवार इस हादसे के बाद कुछ पल के लिए रुककर पीछे देख रहे थे। कुतिया उन सवारों की तरफ झपटी और काफी दूर तक उनके पीछे भागी। पर सवार अपने रफ्तार के दम पर गायब हो चुके थे। बेचारी असहाय कुतिया वापस अपने पिल्ले के पास गई और कराहते हुए अपने बच्चे को सहलाती हुई उसके पास बैठ गई उसकी विवशता औैर करूण स्वर देख मैं विचलित हो उठा। कुछ ही देर में उसका बच्चा दम तोड़ देता है। औैर बेचारी कुतिया अपने मृत बच्चे का सहलाती हुई उसके पास बैठी रहती है। यह सब देख मेरा दिल पसीज गया। औैर एक आवाज मन से आयी शायद वह बाइक सवार अपनी रफ्तार कुछ धीमी रखता तो एक मां का बच्चा उससे बिछडऩे से बच जाता।

Saturday, December 4, 2010

wikileaks ur America

विकिलीक्स ने उड़ाई अमेरिका की नींद
विश्व समुदाय में तहलका मचाने वाली स्वीडिश वेबसाइट विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे इन दिनों विवादों से घिरे हुए है। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय पुलिस संस्था इंटरपोल ने उनकी गिरफ्तारी के लिए रेड कार्नर नोटिस जारी किया है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने विकिलीक्स के खुलासे को अमेरिका और अन्य देशों पर हमला करार दिया है। उन्होंने दुनिया के सभी देशों से साइट द्वारा प्रकाशित किए गए दस्तावेजों पर ध्यान न देने को कहा है।
ज्ञात हो कि विकिलीक्स ने कुछ दिनों पहले करीब ढाई लाख दस्तावेजों को प्रकाशित कर अमेरिका, चीन सहित कई देशों के रहस्यमयी और गोपनीय जानकारियों को उजागर किया था। जिसके बाद से विश्व समुदाय में खलबली मच गई और नए-नए खुलासे होने से सभी हतप्रभ है। कुछ लोगों इन खुलासों को कोरी अफवाह, कहे रह है तो कुछ सच होने का दावा कर रहे है। चीन ने इन सभी  खुलासों को ऊटपटांग और हास्यास्पद बताया। ज्ञात हो कि चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जियांग यू ने कहा कि विकिलीक्स द्वारा किए गए सभी खुलासे टिप्पणी करने लायक भी नहीं है। पर इसके बाद चीन ने अपने यहां साइट पर प्रतिबंध लगा दिया है।
विकीलीक्स के खुलासों से जानकारी मिली है अमेरिकी सेनेट की विदेश संबंध समिति के चेयरमैन जॉन केरी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी सेे इस साल फरवरी में मुलाकात की थी ,तब केरी ने कहा था कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई की योजना को भारत के सामने पेश करे , ताकि भारत सहित  अन्य देशों का उस पर भरोसा बढ़े। लेकिन गिलानी  ऐसा करने से इंकार कर दिया था।
अमेरिका ने कहा कि वह उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा जिन्होंने ये सूचनाएं विकिलीक्स तक पहुंचाई हैं। हिलेरी ने कहा कि इस तरह की गोपनीय सामग्री जारी करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर हमला है।  अमेरिका विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पी जे क्राउले ने कहा कि असांजे जर्नलिस्ट नहीं हैं। जूलियन पॉल असांजे को पॉलिटिशियन करार देते हुए अमेरिका ने आरोप लगाया है कि असांजे देश की मदद करने वाले अंतरराष्ट्रीय तंत्र को कमतर करने की कोशिश कर रहे हैं। इन खुलासों से भन्नाया हुआ महाशक्ति अमेरिका ने अपने सर्चइंजन में लंदन सहित पूरे यूरोप में साइट पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत में भी इस साइट को ओपन नहीं किया जा सकता है। लगता है अमेरिका के प्रभुत्व के चलते भारत सरकार ने यह कदम उठाया है।
विकिलीक्स के खुलासे में भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर के संदेश में कोल्ड स्टार्ट और भारतीय सेना के धीमी होने  की बात की गई थी। जिसका जवाब में भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह ने कहा है कि थलसेना के पास पाक पर हमला करने के लिए कोल्ड स्टार्ट नाम की कोई रणनीति नहीं है। विकिलीक्स के खुलासों से पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन देने के भारत के दावे को बल मिला है। इन खुलासों में सबसे दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तानी की कलई खुद अमेरिका के राडार पर ही खुल रही है और अब विश्व बिरादरी के सामने पाक को कठघरे में खड़ा करने में भारत को आसानी हो सकती है।  भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों के हाथ परमाणु हथियार हाथ लगने की आशंका जाहिर की है।

Friday, November 26, 2010

Aam Aadmi ur Sarkar

बेशक बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के हाथ को आम आदमी का साथ न मिल सका हो पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया और युवराज राहुल को अभी भी पार्टी ब्रांड बनाया हुआ है। हाल ही में कांग्रेस की 125 वीं सालगिरह के अवसर पर लगाए गए पोस्टरों में सोनिया गांधी को 'माता इंडियाÓ और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को 'भगवान श्रीकृष्णÓ के रूप में दिखाया गया है। इन पोस्टरों इलाहाबाद की गली-मुहल्लों को पाट दिया गया । इन पोस्टरों का भारतीय जनता पार्टी सहित सपा ने भी जमकर विरोध दर्ज कराया है। भाजपा ने कांग्रेस को हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने वाली पार्टी करार दिया है।
कांगे्रस की 125 वीं सालगिरह के अवसर पर इलाहाबाद में सोनिया गांधी की एक रैली आयोजित की गयी थी जिसमें सोनिया और राहुल गांधी के लगे पोस्टरों से पूरे शहर को पाट दिया गया। यह रैली 2012 में होने वाले विधानसभाओं चुनावों को टारगेट करते हुए आयोजित की गयी थी। रैली में लगाए गए पोस्टरों का भारतीय जनता पार्टी ने जमकर विरोध  किया। जिसके चलते कार्यकर्ताओं पर लाठियां तक बरसाई गई। वहीं समाजवादी पार्टी ने अपने विरोध स्वरुप काले झंडा दिखाए।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता केसरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि इन पोस्टरों से यही साबित होता है कि कांग्रेस में चमचावाद चरम पर है और मां-बेटे को खुश करने के लिए ही यह सारा खेल किया गया है। इन पोस्टरों के माध्यम से पार्टी को सियासी लाभ पहुंचाने की कवायद स्थानीय नेताओं ने की है। लेकिन लाभ के लिए उठाया गया यह कदम कांग्रेस के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। जैसा की हाल ही में बिहार विधानसभा चुनावों में पार्टी को करारी हार मिली है। जहां पार्टी को पिछले चुनावों में 10 सीटें मिली थी वहीं इस बार केवल 4 सीटें ही मिल सकी। लगता है बिहार चुनावों में मिली इस करारी हार से कुछ सबक लेते हुए पार्टी ने अभी से कमर कस ली है। इसके लिए इलाहाबाद में आयोजित की गयी रैली में सोनिया गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आम लोगों को साथ लेकर आंदोलन में उतरने का निर्देेश दिए। साथ ही केंद्र की योजनाओं को आम आदमी तक पहुंचाने को कहा गया। रैली में जुटी भीड़ को देखकर  कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया उत्साहित नजर आईं। उन्होंनेे रैली में बोलते हुए माया सरकार पर केंद्र से मिले पैसे का सही उपयोग न करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक और यूथ आइकॉन राहुल गांधी का बिहार में कुछ जादू नहीं चल सका। जबकि राहुल गांधी को पार्टी के खेवनहार के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। लगता है बिहार के युवा राहुल की रणनीति और उनकी छवि से प्रभावित नहीं हो पाये। आलम यह रहा कि जहां-जहां राहुल गांधी ने पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में रैलियां एवं सभाएं की थी वहां उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बल पर विधानसभा पहुंचने का सपना देख रहे प्रत्याशियों का सपना चकनाचूर हो गया।
कांग्रेसी नेता मणि शंकर अय्यर ने जेडीयू नेता नीतिश कुमार की जीत को महिला वोट बैंक से मिली जीत बताया  है। उनका कहना है कि नीतिश को केवल बिहार की महिलाओं ने जिताया है। लगता है बिहार की महिलाओं का विश्वास केवल नीतीश में ही है। नीतिश ने बिहार के विकास में जो कार्य किए गए है उनको देखते हुए महिलाओं ने प्रदेश की उन्नति, समृद्धि और कानून के लिए केवल मौजूदा सरकार को ही उपयुक्त पाया है। इसलिए सरकार को पहले से अधिक सीटें प्राप्त हुई है। इन चुनावों में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की रैलियों और सभाओं को बिहार की जनता और खासकर महिलाओं पर कुछ खास असर नहीं दिख सका।  इन चुनावों महिलाओं ने आगे बढ़कर अपने मताधिकार का उपयोग किया है। इलेक्शन कमीशन के अनुसार इस बार बिहार विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने 54.85 फीसदी मतदान किया। जो कि 2005 में हुए विधानसभा चुनावों से 10 प्रतिशत अधिक है। मौजूदा आंकड़ा 2009 में हुए लोकसभा चुनाव की तुलना में 12 प्रतिशत ज्यादा है। प्रदेश के यूथ वर्ग ने भी मौजूदा सरकार में ही अपना विश्वास दिखाया है। बिहार विधानसभा चुनाव में जेडी(यू)-बीजेपी गठबंधन की जीतने यूथ के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी है। युवाओं को अब एजूकेशन और जॉब के लिए घर छोडऩा नहीं पड़ेगा। इस बार बिहार की वोटिंग जातिवादी और धर्म विशेष को आधार न मानते हुए विकासवाद के आधार पर हुई है। जो प्रदेश के साथ-साथ सम्पूर्ण देश के लिए एक गौरव की बात है। काश! बिहार की तरह अन्य प्रदेश के लोग भी जातिवादी और स्वार्थसिद्धि की राजनीति छोड़कर केवल विकास देने वाली सरकार को चुनें तो देश से शीघ्र ही बेरोजगारी, अशिक्षा, हिंसा और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्याएं दूर हो जाएगी और सब लोगों को रोटी कपड़ा और मकान आराम से मिल सकेगा।

 

Monday, October 18, 2010

जम

गाजियाबाद। गाजियाबाद जिसे सभी लोग हॉटसिटी के नाम से जानते है और बहुत से लोग इसकी पहचान छोटी दिल्ली कहकर भी कराते है। यह शहर प्रदेश सरकार को राजस्व देने वालों सर्वाधिक शहरों में से एक है। गाजियबाद शहर की महत्व को इसी बात से जाना जा सकता है भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इसी को अपना चुनावी क्षेत्र बनाया। परंतु इस शहर में कानून व्यवस्था नाममात्र की है। जबकि बसपा सु्रपीमों मायावती ने अपने चुनावी घोषणा में कानून व्यवस्था को कायम करने और रोजगार देने की गारंटी प्रदेश की जनता को दी थी।
कानून व्यवस्था की बात करे तो प्रदेश की पुलिस जनता की रक्षा और सुरक्षा को दरकिनार कर केवल और केवल अपने निजी स्वार्थों में लगी हुई है। जहां देखों पुलिस की गुंडागर्दी, घूसखोरी, निकम्मापन देखने को मिलता है। जहां पुलिस किसी भी दबंग एवं सम्पन्न व्यक्ति की जी हुजुरी करने में थकती नहीं है वहीं किसी गरीब व्यक्ति पर अपना रौब दिखाने से भी नहीं चूकती। गरीब पर अपना रौब दिखाने के बाद उससे जो भी निकाल सके उसे भी लेेने में पीछे नहीं हटती।
पुलिस की लापरवाही और निकम्मेपन को आप किसी भी चौराहे पर कभी भी देख सकते है। जहां पूरे शहर में जाम की एक भयंकर और विकराल समस्या बना हुआ है। यह जाम पुलिस की लापरवाही और अपने कार्य के प्रति निष्ठा की कमी का ही दुष्परिणाम है। शहर के किसी भी चौराहे पर जाम लगा होने पर पुलिसकर्मी वहीं किसी कोने में खड़े होकर आपस में गप्पे लडाने में मशगूल होते है या अपनी कमाई करने ेंमें। परंतु जाम को खुलवाने के लिए कोई कर्मी जल्दी से आगे नहीं आता है। कोई भी पुलिस कर्मी या पुलिस अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी किसी भी चौराहे पर लगे टे्रफिक सिग्नलों के सुचारु रुप से चलने की तरफ ध्यान नहीं देता। शहर के तमाम प्रशासनिक अधिकारी और नेता इन चौराहों से होकर ही आते-जाते है परंतु सिग्नलों के सही ढंग से काम करने की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं जाता है। जनप्रतिनिधि और कोई भी संस्था जो जनता की सभी परेशानियों और उलझनों को दूर करने का दम भरते है वे भी इस ओर से आंखें मूंदे बैठे है।
कोई भी पुलिस कर्मी या अधिकारी यातायात के नियमों का पालन करने के लिए नहीं कहता। पुलिस अफसर या कर्मी के सामने से आप किसी रांग साइड से आइए कोई भी नहीं रोकता। जिसका दुष्परिणाम यह हुआ कि आजकल अपनी साइड छोडकर दूसरे की साइड में चलने का चलन सा निकल पडा है। किसी भी क्रॉसिंग या चौराहे पर सभी को एक दूसरे से पहले निकलने की जल्दी होती है। और इसी जल्दी के चक्कर में आए दिन टैफिक सिग्नलों के हिसाब से कोई नहीं चलता है जिस कारण जाम और दुर्घटनाएं होती है।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी यातायात के नियमों के प्रति स्वयं जागरुक होकर शहर की जनता को जागरुक करने के लिए एक अभियान चलाए। जिससे शहर में आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आ सके और इन पर काबू पाया जा सके। शासन-प्रशासन के द्वारा जनता को टे्रफिक सिग्नलों का पालन करने के लिए जाग्रत किया किए जाने की आवश्यकता है।

Monday, December 14, 2009

जनता की चाहे विकास की राहा

आज हमारे सामने देश में नए -नए राज्यों की मांग उठ रही है ये मांग तेलगाना राज्य की मांग को केन्द्र सरकार से मंजूरी की भनक मिलने के बाद उठी है। काफी समय से जो आन्दोलन शांत थे उन सब में फिर से एक नई चिंगारी जल उठी है । देश में नए राज्यों की मांग में पूर्वाचल , बुंदेलखंड, वेस्ट उत्तर प्रदेश , सोराष्ट, गोरखालैंड , आदि सामिल है। सब की पीछे मांग का आधार विकास को रखा गया है । तर्क ये है की बड़े एरिया होने के कारन विकास नही हो पाता।
मेरा माना है की विकास छोटे या बड़े राज्य के आधर पैर नही होता । विकास होता है सरकार की नीतियों से और जनता के सहयोग से । और सरकार की नीतियों को बनाने के बाद उन पर सही और प्रभावी ढंग से अमल से । जब तक सरकार और नौकरशाही पुरी ईमानदारी के साथ विकास की नियत से अपना काम नही करगी तब तक विकास नही हो सकता ।। चाहे आप विकास के नाम पर पुरे देश के छोटें - छोटें टुकडे क्यों न कर दे। इसलिऐ पहले नौकर शाही और सरकार की जवाव देही के लियें नियम शक्त किए जाय। आप एक छोटा सा उदाहरण किसी ऐसे चोराहें की ले जहा पुलिस कर्मी की ड्यूटी हो। आप अक्सर देखेंगे की पुलिस सड़क पर लगे जाम को हटाने की बजाय आपसी गुफ्तगू में या आराम करने में व्यसत होंगे।